रविवार, 9 अगस्त 2009

रिश्वत

काव्य संकलन - "बहुत जरूरी है "


..:: रिश्वत
::..

रधिया,
अपने माँ-बाप की गरीबी से तंग ।
शराबी बाप का,
रोज-रोज हुड़दंग ।
बेरोजगार भाई की,
आँखों में सपना ।
होता क्यों नहीं,
कोई नौकरी भी अपना ।
लेकर अपने भाई की,
नौकरी की आस ।
चल पड़ी रधिया,
एक अफसर के पास ।
लेकिन वाह री किस्मत,
लूट ली गई अस्मत ।
रधिया मौन थी पर,
ये गरीबी की नय्या है,
खेना ही पड़ता है ।
पैसा नहीं दे सकते,
तो आबरू ही लुटा दो ।
नौकरी के लिए रिश्वत
देना ही पड़ता है ।

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श्री मिथलेश शर्मा 'निसार'
अरजुन्दा, जिला-दुर्ग (छ.ग.)
मो. 9755057245


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सोमवार, 3 अगस्त 2009

पोस्टमार्टम

काव्य संकलन - "बहुत जरूरी है "

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पोस्टमार्टम
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तुम पूछते हो- क्यों भाई,
आप कविता लिखते हैं,
भला समाज में कुछ,
दिखाई देता है परिवर्तन ?
क्या जवाब दूँ,
सड़ी हुई लाशों का,
करता हूं पोस्टमार्टम ।
और तुम पूछते हो,
भाई ये मुर्दा,
ठीक हो जायेगा ना ?....


-------------------------------------श्री मिथलेश शर्मा'निसार'
अरजुन्दा, जिला-दुर्ग (छ.ग.)
मो. 9755057245

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सोमवार, 27 जुलाई 2009

काव्य संकलन - एक आकाश छोटा सा - श्री बी.एल.पाल (SDOP)

काव्य संकलन - एक आकाश छोटा सा


..:: 2 . तस्वीर का यह रूप ::..


चार नंगे दो भूखे
शेर के बाल नोच रहे थे,
चूहे सारा अनाज खा गये,
कपड़ो को दीमक खा गई,
जीने का हक गिरवी रखकर,
चार नंगे............

कान में ऊंगली रखे,
आंख में पट्टी बांध,
कोल्हू के बैल जैसे,
चार नंगे ............

चेहरे पर वेदना ही वेदना के
चिन्ह थे,
असंख्य तार टूटे हुए,
वीणा में धुन कहां,
चार नंगे ............

जिंदगी इतनी जलील हुई,
पीठ का बोझ और,
पीठ पर ही रह गया,
पेट की ज्वाला पर,
राख जम गई ,

चार नंगे..........
चार कदम दायें,
और चार कदम बांयें.
टूटी फूटी झोपड़ियों में,
हड्डियों के ढांचे थे,

चार नंगे ............
गांव के शीलन भरे घरों में,
जिंदा आंखो वाली दीवार है,
गांव है कि देश है,
चार नंगे ............

जलता सत्य,नंगा सत्य
नंगी आंखो से ,
नंगी तस्वीर है
चार नंगे ............


-------------------------------------------------------------श्री बी.एल.पाल (SDOP)
मो. 9425568322
MIG-562/न्यू बोरसी दुर्ग (छ.ग.)

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दुनिया में कहां-कहां...


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