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रविवार, 9 अगस्त 2009

रिश्वत

काव्य संकलन - "बहुत जरूरी है "


..:: रिश्वत
::..

रधिया,
अपने माँ-बाप की गरीबी से तंग ।
शराबी बाप का,
रोज-रोज हुड़दंग ।
बेरोजगार भाई की,
आँखों में सपना ।
होता क्यों नहीं,
कोई नौकरी भी अपना ।
लेकर अपने भाई की,
नौकरी की आस ।
चल पड़ी रधिया,
एक अफसर के पास ।
लेकिन वाह री किस्मत,
लूट ली गई अस्मत ।
रधिया मौन थी पर,
ये गरीबी की नय्या है,
खेना ही पड़ता है ।
पैसा नहीं दे सकते,
तो आबरू ही लुटा दो ।
नौकरी के लिए रिश्वत
देना ही पड़ता है ।

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श्री मिथलेश शर्मा 'निसार'
अरजुन्दा, जिला-दुर्ग (छ.ग.)
मो. 9755057245


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गुरुवार, 23 जुलाई 2009

आओ स्वागत करें..... नये काव्य सृजनकर्ताओं का.......

पिछले कुछ दिनों से मैं प्रयासरत था कि हमारे बीच में रहने वाले उन महान काव्य सृजनकर्ताओं का मुझे सहयोग मिल जाये जिनके काव्य संकलन बहुत बड़ा होने के बावजूद उनका आज तक हम आनंद नहीं ले पाये । आज मेरा वो प्रयास सफल रहा मुझे ऐसे तीन महान काव्य सृतजनकर्ता श्री बी.एल.पाल साहब (SDOP) जी ,श्री कुंवर सिंह निषाद जी (प्रसिद्ध लोक कलाकार एवं छालीबुड अभिनेता) एवं श्री मिथलेश शर्मा जी ( शिक्षक एवं अंचल के प्रसिध्द कवि) मिल ही गया जिनका मुझे काव्य संकलन प्राप्त हो पाया है । जिसे आप सबके बीच कडियों के रूप में प्रस्तुत करना है ।
इसी कड़ी में प्रसिद्ध लोक कलाकार एवं लोकरंग अरजुन्दा के निर्देशक श्री दीपक चन्द्राकर जी एवं श्री चन्द्रकुमार चन्द्राकर (छत्तीसगढ़ी शब्दकोश, मुहावरा एवं लोकोक्तियाँ के रचनाकार ) का भी सहयोग मिलना है जिसे मैं आपके समझ कडियों के रूप में प्रस्तुत करूंगा । तो इंतजार करें ...........और मजा ले उन कविताओं का, उनकी भावनाओं का,उनकी अनमोल रचनाओं का ..................

------------------------------------------------------------------------------- सुभाष गजेन्द्र Mo. 9893456232

दुनिया में कहां-कहां...


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