शनिवार, 25 जुलाई 2009

.. ऊँच-नीच के भेद भाव ..

आप मनला मे बताथों
ये सुराज के बाद के बात ये,
कोन्हों काहत हे अरे चुप रहा,
हमर ऊँचा जात हे,
ऊँच-नीच अउ जात-पात के,
झगरा बहुत पुराना हे,
ऊँच-नीच के भेद मिटाके,
गांव में अलख जगाना हे,
हिन्दू,मुस्लिम,सिख,ईसाई,
ये भूंइया के लाल ये,
जात-पात ला छोड़ दो भइया,
ये तो जी के काल ये,
छोटे-बड़े के भेद भुलाके,
सबला देखो समान हे,
जे भूंइया के सेवा करही,
उही सबले महान हे ।।


- कुंवर सिंह निषाद, अरजुन्दा मो.9977861910

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गुरुवार, 23 जुलाई 2009

आओ स्वागत करें..... नये काव्य सृजनकर्ताओं का.......

पिछले कुछ दिनों से मैं प्रयासरत था कि हमारे बीच में रहने वाले उन महान काव्य सृजनकर्ताओं का मुझे सहयोग मिल जाये जिनके काव्य संकलन बहुत बड़ा होने के बावजूद उनका आज तक हम आनंद नहीं ले पाये । आज मेरा वो प्रयास सफल रहा मुझे ऐसे तीन महान काव्य सृतजनकर्ता श्री बी.एल.पाल साहब (SDOP) जी ,श्री कुंवर सिंह निषाद जी (प्रसिद्ध लोक कलाकार एवं छालीबुड अभिनेता) एवं श्री मिथलेश शर्मा जी ( शिक्षक एवं अंचल के प्रसिध्द कवि) मिल ही गया जिनका मुझे काव्य संकलन प्राप्त हो पाया है । जिसे आप सबके बीच कडियों के रूप में प्रस्तुत करना है ।
इसी कड़ी में प्रसिद्ध लोक कलाकार एवं लोकरंग अरजुन्दा के निर्देशक श्री दीपक चन्द्राकर जी एवं श्री चन्द्रकुमार चन्द्राकर (छत्तीसगढ़ी शब्दकोश, मुहावरा एवं लोकोक्तियाँ के रचनाकार ) का भी सहयोग मिलना है जिसे मैं आपके समझ कडियों के रूप में प्रस्तुत करूंगा । तो इंतजार करें ...........और मजा ले उन कविताओं का, उनकी भावनाओं का,उनकी अनमोल रचनाओं का ..................

------------------------------------------------------------------------------- सुभाष गजेन्द्र Mo. 9893456232

शुक्रवार, 10 जुलाई 2009

छत्तीसगढ़ के एक कदम......छत्तीसगढ़ी आपरेटिंग सिस्टम


आज सबेरे-सबेरे ले नहात-नहात गली मा लोगन के भाखा मिलत रिहिस -चल गा अब हमर छत्तीसगढ़ी मा कम्पूटर सीखे बर मिलही । मेंहा अचरज मा पड़ गेवं का बात होगे भई आज गली-खोर मा काबर अइसन गोठ हावथे , जा के देखे जाए तभे ये बात के पता चलहि । नहा के ऊंकर तीर मा महूं हा जाके देखेवं त पता चलिस पेपर मा खबर छपे हावय - छत्तीसगढी भी समझेगा कम्प्यूटर । जेमा बताये गे रिहिस हे कि अब कम्पूटर सीखे बर अंगरेजी नई सीखे बर पड़े । कम्पूटर हा छत्तीसगढ़ी मा काम करही जेकर ले अब कम-पढे़ लिखे मइनखे मन घलोक येला सीखहि अऊ ऊंकर काम सरलगहा हो जाही .

चिठ्ठासंसार ले जुड़े हमर भाई मन बर ये खबर पुराना हे, ऊमन तो पहिली च ले ये बात ला जानत हे कि हमर रवि भैय्या अइसन ढ़ंग ले एक ठन आपरेटिंग सिस्टम बनात हे । फेर हमर गांव मा रहवइय्या मइनखे मन ला पता नई रिहिस। मेन लाईन ला देखंव त महू ला पक्का मालूम पड़ गे रिहिस, ये तो हमर रवि रतलामी भैय्या के खबर आय । जेहा दू साल ले अपन मेहनत ले अतिक बडे काम करत रहिस । अऊ आज ओकर ये पूरा काम होके रिहिस .धनभाग हे छत्तीसगढ़, जिहाँ के सपूत हा अइसन काज करिस अऊ छत्तीसगढ़ ला एक कदम अऊ रेंगइस .


(साभार- नई दुनिया दैनिक समाचार पत्र)

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