शनिवार, 7 नवंबर 2009

सूपा मन चुप बइठे हें अऊ, चलनी बिक्कट बोलत हे ।

सूपा मन चुप बइठे हे अऊ,
चलनी बिक्कट बोलत हे ।
कोइली ताकत बइठे हे,
अऊ कागा आम खखोलत हे ।।
छाती के तै दूध पियाए ,
लइका के बड़ साद रहिस ,
उही दूध ला पीके बेटा,
छाती ला अब छोलत हे ।
सूपा मन ...........
मटिया कस सब खुसर-खुसर,
हमला जी फोकला कर दिन ।
परे बिपत में उही मनखे मन अब ,
हमला ठोलत हे ।।
सूपा मन ...........
दू दिन रहिके चह देहूँ मैं ,
अइसन आस बंधा रहिगे ।
मार कुंडली फन काढ़त हे ,
दुख हालत न डोलत हे ।।
सूपा मन ...........
दू कउड़ी अउकात नही तेन ,
सान देख ले 'पकलू' अब ।
हमर लिलामी होत देखके ,
अउने-पउने मोलत हे ।।
सूपा मन ...........

मौलिक/अप्रकाशित/अप्रसारित


मिथलेश शर्मा निसार
(कवि निवास) अरजुन्दा
जिला-दुर्ग (छ.ग.) ४९१२२५

शनिवार, 31 अक्टूबर 2009

इरखा निंदा में काबर बूड़े रहिगेन जी........

इरखा निंदा में काबर बूड़े रहिगेन जी,
तातारस्सी में काबर करू कहिगेन जी ।
गीता पढ़ेन अउ रामायण पढ़ेन,
तभो ले कुद-कुद के हमन लड़ेन जी,
मनखे हो के निसाचर बने रहिगेन जी ।
सुम्मत के डोरी ला छरिया डरेन ।
अपन मुँहु ला अपनेच करिया डरेन ।
कइसे काखर बहकना में हम बहिगेन जी ।
बिलई-झगरा मा बेंदरा मजा मार दिस ,
हमर पेटे मा भुर्री, दुसर बार दिस ।
कइसे पखरा ला छाती मा,हम सहिगेन जी ।


मौलिक/अप्रकाशित/अप्रसारित


मिथलेश शर्मा'निसार'
(कवि निवास) अरजुन्दा
जिला-दुर्ग (छ.ग.) 491225

शुक्रवार, 14 अगस्त 2009

विडम्बना


॥ विडम्बना
॥
....
आज
आदमी पैदा नहीं होता है,
हिन्दू पैदा होता है,
मुस्लिम पैदा होता है,
हिन्दुस्तान में,
ब्राह्मण, क्षत्रीय, वैश्य, शुद्र,
पाकिस्तान में,
सिया और सुन्नी पैदा होता है,
अफ्रीका में,
गोरा और काला पैदा होता है,
आदमी गुलाम पैदा होता है,
शासक पैदा होता है,
आदमी,
कहीं पैदा नहीं होता है,
बनता है,
प्रगतिशील, परम्परावादी,
सुधारवादी, प्रतिक्रियावादी,
नहीं बनता है, सिर्फ आदमी,
करता है,
शासन की सेवा, समाज की सेवा
खुद की सेवा, देश की सेवा,
नहीं करता है, आदमी की सेवा,
जहर भर गया है हवाओं में,
आदमी सस्ते में बीक रहा है ,
चौराहों पर..........


श्री बी.एल.पाल (SDOP)
मो.-9425568322
MIG-562/न्यू बोरसी दुर्ग

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दुनिया में कहां-कहां...


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