शनिवार, 4 जुलाई 2009

भारतीय संस्कृति पर कुठाराघात-समलैंगिकता कानून

पिछले दिनों दिल्ली उच्च न्यायालय ने दो पुरूषों के आपसी रजामंदी से शारीरिक संबंध बनाने से भारतीय कानून की धारा 377 को अवैध ठहराते हुए कहा है कि - समलैंगिकता अपराध नहीं है। यह फैसला हमारी भारतीय संस्कृति के बिल्कुल विपरीत है भारतीय समाज इसे कभी स्वीकार नहीं कर सकता,विश्व के सभी धर्म इस तरह के संबंध को कभी उचित नहीं ठहराया है । इस तरह के संबंध से हमारा समाज,हमारी संस्कृति बिल्कुल ही तबाह हो जाएगा । पश्चिमी देशों की नकल करते-करते हमारे देश की न्याय पालिका भी इसका शिकार हो गया है और अपने ही देश के कानून को अवैध ठहराया जा रहा है । समलैंगिकता एक तरह से अमानवीय कृत्य है, साथ-ही-साथ एक तरह से गंभीर मानसिक रोग भी । इस कानून के बन जाने से सामाजिक स्तर पर इस का बहुत ही गंभीर दुष्प्रभाव पड़ेगा युवाओं के साथ-साथ बच्चों में भी यह मानसिक रोग बहुत जल्द ही पनपने लगेगा . बच्चे अपने माँ-बाप से ही पूछेंगे ये समलैंगिकता क्या होता है ? तब मां-बाप क्या कह सकेंगे अपने बच्चों से ?

हमारा आजाद भारत वास्तव में अभी गुलामी की जिंदगी काट रहा है विदेशी संस्कृति को जिस तरह से हमारे देश में अपनाया जा रहा है उससे तो यही लगता है । इस तरह के कानून को विश्व में गिनती के कुछ देशों में ही मान्यता प्राप्त है जिसके आधार पर हमारी न्यायपालिका इसे कानूनी जामा पहना रही है । आज इसे कानून बनाया जाएगा तो कल वेश्यावृत्ति को क्योंकि वेश्यावृत्ति को तो पश्चिमी देशों में मान्यता प्राप्त है । किसी की स्वतंत्रता के नाम पर इस तरह के संबंध को जायज ठहराना हमारी संस्कृति कभी उचित नहीं मान सकती । हमारे देश में विवाह जैसे पवित्र रिश्ते मौजूद है बावजूद इसके इस तरह के कानून को मान्यता देना समझ से परे है ऐसे कानून से हमारा समाज जबर्दस्त विकृति की ओर अग्रसर हो जाएगा ।

बुधवार, 24 जून 2009

किसान के बिश्वास ल नई तोड़िस भगवान जगन्नाथ .......

आषाढ़ के महीना मा जेठ-बैसाख के गरमी तान दिस । गरमी देख के सब्बो मइनसे मन थोथना ला ओरमा दे रहिस, थोथना ओरमाये के कारण वाजिब हे । भरे आषाढ़ मा किसान हा नांगर-बख्खर धर के खेत जोते ला जाये ला छोड़ के घरे मा सुस्तात रहिन । खेती किसानी के जम्मो तैयारी ल कर डारिस फेर एके ठन बात मन मा घर करत रहिस । ऐसो पानी गिरही ते नई गिरही भगवान,फेर मन मा एक ठन आस घलो रहिस भगवान के घर मा देर हे पर अंधेर नई हे . इही दिन आषाढ़ मा भगवान जगन्नाथ के रथयात्रा घलो होथे . आदि काल ले एक ठन बात हर किसान हा जानत हे आज के दिन पानी जरूर बरस थे , भगवान जगन्नाथ हा पानी जरूर बरसाही अऊ नही ते दू बूंद गिराही फेर सुख्खा नई पारे. आज के दिन किसान मन के विश्वास अऊ भगवान के भक्ति ले ये जरूर पूरा होथे,अऊ खुशी-खुशी अपन किसानी बूता के शुरूवात करथे .

ये साल के गरमी तनई ला देख केकिसान फिकर करत रहिस पानी गिरही त नई गिरही इंकर चिंता फिकर ला मौसम के जानकार हमर वैज्ञानिक मन अऊ बढात रहिस कभू काहत हे मानसून आगे त कभू काहत हे मानसून भटक गे . चिंता फिकर करत किसान अनमनहा ढंग ले किसानी बूता करते रहिन फेर रथयात्रा के विश्वास ला घलो धरे रहिस . आज वो दिन आगे रथयात्रा के, भगवान जगन्नाथ,बलभद्र अऊ सुभद्रा के सवारी के, संझा ढले के बेरा मा अपन परताप ले अऊ किसान के विश्वास ले गली बोहऊ पानी बरसा दिस अऊ भगवान जगन्नाथ हा इंकर विश्वास ला नई तोड़िस ... कारण चाहे कोनो हो पानी बरस गे अऊ इंकर बिश्वास मा एक ठन गांठ अऊ बंधागे ....।

दुनिया में कहां-कहां...


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