शुक्रवार, 5 जून 2009

का होही हमर छत्तीसगढ़ के ....?




दू दिन होगे हमर जतका भी संदेश देवइय्या ठिकाना अखबार होय ते रेडिया अऊ नही ते टीबी सब्बो मा एके ठन खबर हा छा गेहे फलाना जगा गोली मिलिस त फलाना जगा मा बारूद । का हमर छत्तीसगढ़ के इही चिन्हारी हरे, का इंकरे मन हे हमर छत्तीसगढ़ के चिन्हारी होही ? 

दू दिन पहिली के बात हे दुरूग राज के दादर-पथर्रा गौंव के मशानघाट करके कुआं मा अड़बड़ अकन बंदूक के गोली मिलिस हावे । कोनों ल एस.एल.आर.,कोनो ल रिवाल्वर कहात हावे त कोनों ल देशी कट्टा के । आनी बानी के तमंचा (पिस्तौल) के गोली मिलिस हाबै । भगवान जाने ये काकर आय, पुलिस मन येला नक्सली मन के हरे कहाथ हाबय । जांच पड़ताल हा अभी पूरा नई होहे फेर अनुमान इही हे ऊंकरे च मन के होही । ये बात ह पूरा नई होय पर पइस आजे के अखबार म अऊ खबर छपगे गंगरेल बांध मेर एक ठन गाड़ी पकड़ा गे । अइसन गाड़ी जेमा 20 ठन संदूक मा बारूद भराय रहिस । अतिक अकन बारूद मिले के मतलब का होईस । ये बात होइस पकड़ा गे तब फेर कोन जाने अऊ कतका असन गाड़ी हा बोचक गे होही । कोन जाने अऊ कतिक ठन कुंआ, डबरा अऊ तरिया मा ये गोली, बारूद ल लुका दे होही ?
एक समय रिहिस जेमा हमर छत्तीसगढ़ ला धान के कटोरा कहे जात रहिस। हमर एक अलगे चिन्हारी रहिस । फेर कोन जाने ये दू-चार साल में काकर नजर लग गे ये छत्तीसगढ़ महतारी ला । रात दिन इंकरे मन के खबर हा छा गेहे । का ये नक्सली हमर छत्तीसगढ़ ला होरा कस भूंज दे बर चाहत हे ? का इंकरे मन ले हमर छत्तीसगढ़ के चिन्हारी होही ? का होही हमर छत्तीसगढ़ राज के .....?

बुधवार, 3 जून 2009

स्वतंत्रता संग्राम सेनानी श्री उम्मेद सिंह कलिहारी


श्री उम्मेद सिंह कलिहारी दुर्ग जिले के उन गिने-चुने लोंगो में से एक है जिन्हे 1930 के कांग्रेस अधिवेशन में भाग लेने का मौका मिला था । गाँधी जी के व्यक्तित्व से अभिभूत श्री कलिहारी अक्सर कहा करते थे कि मैंने अपने संघर्ष पूर्ण जीवन में भूदान,ग्राम दान तथा ग्राम स्वराज आन्दोलन में भाग लेकर संगम स्नान कर लिया । महात्मा गाँधी के पहली बार के दुर्ग आगमन पर उनसे मुलाकात को वे कभी नही भूले । 

श्री उम्मेद सिंह कलिहारी का जन्म सन् 1905 को ग्राम भरदकला में हुआ । ग्राम अर्जुन्दा में छटवीं कक्षा तक की शिक्षा प्राप्त करने के प्रश्चात अर्जुन्दा में ही सहायक शिक्षक के रूप में उनकी नियुक्ति हुई । शिक्षक के रूप में कार्य करते हुए महात्मा गाँधी के विचारों से प्रभावित हुए एवं देश प्रेम की भावना लिये आजादी के आन्दोलन में कूद पड़े और लोगों के बीच आजादी के महत्व को बताना शुरू किये । 1942 में महात्मा गांधी के करो या मरो के नारे को बुलंद करते हुए आजादी की लड़ाई में कूद पड़े । आन्दोलन अपने चरम सीमा पर था तभी श्री कलिहारी को पुलिस ने गिरफ्तार कर रायपुर सेन्ट्रल जेल भेज दिया 9 माह की लंबी सजा अगस्त 1943 तक चली  । जेल से रिहा होकर पुनः स्वतंत्रता आन्दोलन को गति प्रदान करते रहे । क्षेत्र के लोंगो को भी कलिहारी द्वारा प्रचारित आजादी की बातें समझ आने लगी इस तरह से श्री कलिहारी शिक्षकीय जीवन छोड़कर देश की आजादी के लिए अर्जुन्दा सहित दुर्ग जिले भर में कार्य करते रहे और आजादी को प्राप्त किये । 

देश की स्वतंत्रता के पश्चात देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू द्वारा दिये गये आदेश के तहत श्री उम्मेद सिंह कलिहारी की पुर्ननियुक्ति अर्जुन्दा के स्कूल में ही हुई एवं आजादी के बाद दुर्ग जिला शिक्षक संघ के अध्यक्ष का दायित्व भी पूरा किया एवं कई महत्वपूर्ण समस्याओं का समाधान भी कराये । सन् 1955 में श्री कलिहारी संत विनोबा भावे के साथ जुड़ गये एवं उनके प्रसिद्ध भूदान आन्दोलन में सक्रियता के साथ जुड़कर विनोबा जी के हीरक जयन्ती के अवसर पर श्री कलिहारी द्वारा दुर्ग जिले के पचास हजार के लक्ष्य में सैतालिस हजार रूपये संग्रहित कर विनोबा भावे जी को भेंट किये । श्री कलिहारी हमेशा संयमित जीवन जीते रहे इनके द्वारा महात्मा गांधी के जन्म शताब्दी वर्ष की पुण्यतिथि के अवसर पर संकल्प लिये की आज से मशीन से पीसा हुआ आटा, मशीन का चावल एवं शक्कर ग्रहण नहीं करना जिसका पालन वे जीवन पर्यन्त करते रहे । वे गांधी जी से अत्यंत ही प्रभावित रहे जिसके फलस्वरूप अपने शिक्षकीय जीवन में ही उन्होनें चरखे से सूत कातना शुरू कर दिये थे । गांधी टोपी तो वे विद्यार्थी जीवन से ही पहनते थे । 
क्षेत्र के एकमात्र स्वतंत्रता संग्राम सेनानी श्री उम्मेद सिंह कलिहारी का देहावसान 28 अगस्त 1994 को हुआ । उनके द्वारा आजादी के पूर्व एवं आजादी के बाद देश एवं समाज के लिये किये गये सेवा कार्य को पुण्य स्मरण करते हुए सादर प्रणाम .......। 

साभारः श्री क्रांतिभूषण साहू (प्रपौत्र श्री उम्मेद सिंह कलिहारी) सरपंच,ग्राम पंचायत भरदाकला से प्राप्त जानकारी के आधार पर 

रविवार, 31 मई 2009

उस नवजात का क्या कसूर....

आज सुबह-सुबह मैं स्थानीय समाचार पत्र पढ़ रहा था । समाचार पत्र के मुख पृष्ठ पर छपी एक खबर को पढ़कर बहुत दुःख हुआ क्योंकि खबर ही ऐसी थी दिल दहला देने वाली । घटना का विवरण कुछ इस प्रकार था - 
पत्नी से झगड़ने और मारपीट के बाद गुस्साये एक युवक ने अपने नवजात शिशु पर मिट्टी तेल डालकर जलाने का प्रयास किया । उस नवजात शिशु को इस धरती पर आये मात्र 22 दिन ही हुये थे । उक्त शिशु को जिला अस्पताल में दाखिल कराया गया है जहां उसकी स्थिति गंभीर बताई गई है । दिल दहला देने वाली यह घटना बालोद के जवाहर पारा-खाल्हेपारा में शनिवार को हुई । 

जवाहर पारा-खाल्हेपारा झोपड़पट्टी में रहने वाले नईम कुरैशी जिसकी उम्र 28 वर्ष का अपनी पत्नी गायत्री उर्फ परवीन उम्र 27 वर्ष के साथ अक्कर लड़ाई-झगड़ा होता था । दोनों ने प्रेम विवाह किया था । घटना के दिन भी नईम और गायत्री के बीच जमकर विवाद हुआ था । नईम ने गाली-गलौच के साथ अपनी पत्नी की पिटाई करने के बाद गुस्से से खाट में सो रहे अपने नवजात शिशु पर मिट्टी तेल डालकर माचिस मारकर जलाने का प्रयास किया । गायत्री की चीख व मारपीट की आवाज सुनकर पंहुचे पड़ोसी खिलावन कुमार ने किसी तरह मासूम बच्चे को आग से हटाकर स्थानीय अस्पताल ले गया । बच्चे की स्थिति को देखते हुए डाक्टर ने फौरन ही जिला अस्पताल के लिए रिफर कर दिया । मोहल्ले के लोगों के अनुसार इस दंपत्ति के दो और संतान सुहाना और शाहीन है जिसकी उम्र क्रमशः 5 वर्ष एवं 4 वर्ष है ।

दुनिया में कहां-कहां...


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